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Thursday, 21 June 2018

आकाशीय बिजली गिरने से किसान की मौत

ग्रामीण मीडिया सेण्टर| 



मुलताई



 तहसील क्षेत्र के प्रभात पट्टन विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत वायगांव की सम्मिलित ग्राम वायगांव ढाना में गुरूवार को दोपहर में खेत में काम कर रहे किसान पर आकाशीय बिजली गिर गई, जिससे किसान की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। मिली जानकारी अनुसार किसान रमेश पिता चिक्कू धुर्वे 50 वर्ष खेत में काम कर रहा था। इस दौरान अचानक हल्कि बारीश के साथ आकाशीय बिजली तेज गरज के साथ गिर गई। जिसकी चपेट में आने से किसान की मौके पर मौत हो गई। सूचना मिलते ही मासोद चौकी पर तैनात पुलिस कर्मियों द्वारा मौके पर पहुंचकर पंचनामा तैयार कर शव को पोस्ट मार्टम हेतु भेजा गया।


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दुर्घटना में घायल ट्रेक्टर चालक ने तोड़ा दम

ग्रामीण मीडिया सेण्टर|

इलाज का अधिक खर्च वहन नही कर पाया परिवार, दुर्घटना में घायल ट्रेक्टर चालक ने तोड़ा दम


मुलताई

 तहसील क्षेत्र के ग्राम सर्रा हेटी मार्ग पर 10 जून को दहाड़ नदी की पुलिया में ईंटो से भरी ट्रेक्टर ट्राली पलटने से मौके पर एक बालक की मौत हो गई थी वहीं अन्य मजदूर घायल हुए थे। घायलों में ट्रेक्टर चालक अशोक पिता माटू उईके 22 वर्ष निवासी जमदेही खुर्द भी गंभीर रूप से घायल हुआ था। घायलों को उपचार हेतु नागपुर ले गए थे। जहा अशोक के उपचार हेतु अधिक खर्च बताने पर परिजन इलाज का खर्च वहन करने में असमर्थ थे। जिनके द्वारा अशोक को बगैर उपचार कराए घर ला लिया था। अशोक ने 12 जून को घर में ही दम तोड़ दिया था। परिजनों द्वारा पुलिस को बगैर सूचना दिए अशोक का अंतिम संस्कार तक कर दिया था। जब पुलिस ट्रेक्टर चालक की तलाश में जमदेही खुर्द पहुंचे तो उन्हे अशोक की मौत व उसका अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी लगी। जिसके बाद पुलिस ने गुरूवार को मर्ग कायम किया।

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बैतूल की छात्रा ने की इंदौर में आत्महत्या

ग्रामीण मीडिया सेण्टर|


ग्रामीण मीडिया सेण्टर| 

उस होनहार डॉक्टर का अंतिम पत्र 

आठनेर



इंदौर के प्राइवेट कालेज इंडेक्स में MBBS की पढ़ाई करने वाली बैतूल जिले की छात्रा ने मनमानी फीस वसूली और प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली है । आत्महत्या करने वाली स्मृति साहू ने कॉलेज की दिन रात की प्रताड़ना और मनमानी फीस से तंग आकर यह कदम उठाया और मृतीका के सुसाइट नोट में स्पष्ट रूप से सभी बिन्दुओ का उल्लेख किया है जिससे साफ जाहिर होता है की उसे यह कदम उठाने के लिए बाध्य किया गया। घटना के बाद से हिडली के साहू समाज ने कालेज प्रबन्धन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग करते है।

।। यह लिखा है सुसाइड नोट में ।।

मुझे माफ कर देना मम्मी, स्वामी और सूर्या, मै डॉ स्मृति लहरपुरे पूरे होश हवास में लिख रही हूं न ही कभी मैने कोई नशे या दवाई का सेवन ही किया है। सबसे पहले मै अपनी माँ और भाईयों से माफी चाहती हूं कि मैं ऐसा कदम उठा रही हूं क्योंकि तुम तीनों ने हर विपरीत परिस्थितियों में मेरा साथ दिया, मै इन लोगों ने और नहीं लड़ सकती इसलिए मुझे माफ कर देना। 

मेरी मौत के लिए सीधे तौर पर इंडेक्स कॉलेज के चैयरमैन सुरेश भदौरिया और उनके कॉलेज का मैनेजमेंट है, इनमें मुख्यरूप से डॉ के के खान हैं क्योंकि इन दोनों के द्वारा मुझे लगातार प्रताडित किया जा रहा था। मैने जून 2017 में नीट परीक्षा के माध्यम से ज्वाइन किया था। काउंस्लिंग के दौरान मुझे जो फीस बताई गई थी उसके अनुसार टयूशन फीस 8 लाख 55 हजार और होस्टल फीस 2 लाख थी। इसके बाद जब मैं कॉलेज में ज्वाइन करने आई तो इंडेक्स कॉलेज प्रबंधन ने मुझसे कॉशन मनी और एक्सट्रा करिकुलर एक्टीविटी के नाम पर फिर 2 लाख मांगे। 

मैं मध्यमवर्गीय परिवार से हूं इसलिए अतिरिक्त फीस नहीं चुका सकती थी लेकिन नीट परीक्षा के बाद बामुश्किल मिला पीजी करने का यह अवसर हाथ से न निकल जाए इसलिए मैने 2 लाख का फिर लोन लिया, इसके बाद जैसे ही मैं ज्वाइन करने पहुंची कॉलेज प्रबंधन ने फिर दो लाख मांग लिए इसके बाद रातभर के प्रयास के बाद मैने अपनी सीट खोने के डर से मैने यह व्यवस्था भी की लेकिन कॉलेज ने टयूशन फीस 8 लाख 55 हजार से 9 लाख 90 हजार कर दी और सभी छात्रों से यह फीस जमा करने को बोला जाहिर से अचानक एक लाख 35 हजार की फीसवृद्धि सहन करना हर किसी के लिए मुश्किल था इसलिए हम सभी लोग इसके खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट गए। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने मुझे व्यक्तिगत तौर पर प्रताड़ित करना शुरु कर दिया इसके अलावा फोन पर भी मुझे यह केस वापस लेने के लिए धमकाया जाने लगा। 

इसके बाद कोर्ट ने इंडेंक्स कॉलेज को निर्धारित फीस लेने का आदेश दिया लेकिन इसके बाद फिर अगले साल 2017 में फिर 9 लाख 90 हजार मांगने लगे जो मैने जमा नहीं कर कोर्ट के आदेशानुसार 8 लाख 55 हजार ही जमा किए, इस मामले में कोर्ट जाने पर कॉलेज प्रबंधन हमे लगातार प्रताडित करने लगा खासकर एचओडी डॉ खान, इसके बाद इसी मामले में केस वापस लेने की शर्त पर  एचओडी डॉ खान ने अमानवीय व्यवहार करते हुए सार्वजनिक तौर पर हमे 2 से 3 महिने तक ओटी और डिपार्टमेंट से बाहर निकाले रखा। इसके बाद हमारा स्टायफंड भी काट लिया गया और बिना कारण हमपर हजारों रुपए का फाइन लगाया जाने लगा। कॉलेज प्रबंधन हमे इस समय का स्टायफंड कभी नहीं देना यदि कॉलेज में उस दौरान मेडीकल काउंसिल का दौरा और इनकम टैक्स का छापा नहीं पड़ता। 

मेरी एचओडी के के खान मुझे व्यक्तिगत तौर पर प्रताडित करती थी वह यह सोचती थी  कोर्ट केस करने में मेरी सक्रीय भूमिका है दरअसल वह मानसिक रूप से बीमार है इसलिए वह सायकिक रोग का इलाज भी करवा रही है वह मेडीकल कॉलेज के इस प्रोफेशन के लिए फिट नहीं है खासकर एनेस्थेटिक ब्रांच के लिए। वह हर किसी को प्रताड़ित करती है पर मैं नहीं जानती कि उसे मुझसे क्या प्राव्लम रहती थी वह मेरे लीव एप्लीकेशन पर साइन नहीं करती थी और मेरे लीव पर होने पर एचआर विभाग से मुझपर हजारों रुपए का फाइन लगवाती थी। हम पीसी स्टूडेंट होने के बावजूद भी यहां प्रताड़ित हो रहे हैं हमारा ड्यूटी टाइम सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक है इसके बावजूद दिन में चार बार एटेंडेंस के लिए पंच करना पड़ता है, हद तो यह है कि एक दिन की लीव पर एचओडी डॉ खान ने मुझपर 4500 से 6000 रुपए का फाइन लगाया, जिसपर पहले से ही भारी लोन हो उसके लिए यह राशि भर पाना संभव नही था।

 कुछ दिनो पहले मैने थर्ड ईयर की फीस जमा करने को बोला तो फिर फीस 9 लाख 90 हजार कर दी गई जिसे जमा करने से मैने मना कर दिया इस बारे में मैने डॉ अमोलकर को भी बताया था, इसके बाद चैयरमैन सुरेश भदौरिया ने मैनेजमेंट को उन सभी छात्रों से बकाया फीस वसूलने का आदेश दिया जिन्होंने कोर्ट के निर्देशानुसार फीस जमा की थी यह राशि तीन साल की प्रति छात्र चार लाख 5 हजार थी और किसी भी हालत में मैं बढ़ी हुई फीस जमा नहीं कर सकती थी। मेरे माता पिता पहले से ही बढ़ी हुई फीस के लिए रिश्तेदारों और दोस्तों से रुपए उधार ले चुके थे जिनके बस में यह राशि जमा करना संभव नहीं था। 

मेरी उम्र में अन्य इंजीनियरिंग लॉ और आर्ट सब्जेक्ट इतना कमा लेते हैं कि अपना खर्चा उठा सकें जबकि मैं सिर्फ अपने घरवालों पर ही निर्भर हूं, वह भी इसलिए कि मैं एक डॉक्टर हूं। मैने स्कॉलर और स्कूलिंग रेपुटेड कॉलेज गांधी मेडीकल कॉलेज और सेंट्रल स्कूल से की है मैने इंडेक्स कॉलेज जैसा फर्जी संस्थान पहले कभी नहीं देखा था। यहां कोई इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यवस्था डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के लिए नहीं है। इन्होंने अभी भी रिश्वत और धमकी देकर एमसीआई की मान्यता हासिल की है। मान्यता के दौरान मैने खुद इनके कंसलटेंट के फर्जी दस्तावेज और फर्जी साइन देखे हैं। ये लोग सिर्फ पीजी स्टूडेंट को प्रताडित करने में लगे हैं और खुद की नाकामी का आरोप हमपर लगाकर फीस बढ़ाते हैं और आए दिन हमारा स्टायफंड काटते रहते हैं। 

आधी रात को इनके इशारे पर शराब पीकर कुछ लोग स्टूडेंट के पास भेजे जाते हैं और लोग हमसे कोरे कागज पर साइन मांगते हैं। जो पीजी स्टूडेंट साइन करने से मना कर देता है उसपर अगले दिन मेडीकल सुप्रीटेंडेंट बिना कारण के हजारों रुपए का फाइन लगा देता है। यह असहनीय है मैं इतने इतनी प्रताड़ना और लूट सहते हुए इतने दबाव में काम और पढ़ाई नहीं कर सकती। इसलिए मैने इससे मुक्त होने का निर्णय लिया है मैं हमेशा इन लोगों से नहीं लड़ सकती। 

मैं जानती हूं मैं सुरेश भदौरिया के सामने बहुत छोटी हूं पर मैं अपने माता पिता और परिवार को कर्ज और लोन के बोझ तले नहीं देखना चाहती। मेरी एक ही अंतिम इच्छा है कि सुरेश भदौरिया को इसके बदले में सजा मिलनी चाहिए और मेरे परिवार को मेरी पूरी फीस लौटाई जाना चाहिए। और मेरे साथ पढ़ने वाले पीजी स्टूडेंट से विनती है कि आखिर तक इकट्‌ठे रहकर एक दूसरे की मदद करते रहें। प्लीज इस कॉलेज को बंद करो जहां मरीजों की जिंदगी और कॉलेज स्टूडेंट के करियर का विनाश किया जाता हो।

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बैतूल की छात्रा ने इंदौर की आत्महत्या , पढ़े अंतिम पत्र

ग्रामीण मीडिया सेण्टर| 

उस होनहार डॉक्टर का अंतिम पत्र 

आठनेर



इंदौर के प्राइवेट कालेज इंडेक्स में MBBS की पढ़ाई करने वाली बैतूल जिले की छात्रा ने मनमानी फीस वसूली और प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली है । आत्महत्या करने वाली स्मृति साहू ने कॉलेज की दिन रात की प्रताड़ना और मनमानी फीस से तंग आकर यह कदम उठाया और मृतीका के सुसाइट नोट में स्पष्ट रूप से सभी बिन्दुओ का उल्लेख किया है जिससे साफ जाहिर होता है की उसे यह कदम उठाने के लिए बाध्य किया गया। घटना के बाद से हिडली के साहू समाज ने कालेज प्रबन्धन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग करते है।

।। यह लिखा है सुसाइड नोट में ।।

मुझे माफ कर देना मम्मी, स्वामी और सूर्या, मै डॉ स्मृति लहरपुरे पूरे होश हवास में लिख रही हूं न ही कभी मैने कोई नशे या दवाई का सेवन ही किया है। सबसे पहले मै अपनी माँ और भाईयों से माफी चाहती हूं कि मैं ऐसा कदम उठा रही हूं क्योंकि तुम तीनों ने हर विपरीत परिस्थितियों में मेरा साथ दिया, मै इन लोगों ने और नहीं लड़ सकती इसलिए मुझे माफ कर देना। 

मेरी मौत के लिए सीधे तौर पर इंडेक्स कॉलेज के चैयरमैन सुरेश भदौरिया और उनके कॉलेज का मैनेजमेंट है, इनमें मुख्यरूप से डॉ के के खान हैं क्योंकि इन दोनों के द्वारा मुझे लगातार प्रताडित किया जा रहा था। मैने जून 2017 में नीट परीक्षा के माध्यम से ज्वाइन किया था। काउंस्लिंग के दौरान मुझे जो फीस बताई गई थी उसके अनुसार टयूशन फीस 8 लाख 55 हजार और होस्टल फीस 2 लाख थी। इसके बाद जब मैं कॉलेज में ज्वाइन करने आई तो इंडेक्स कॉलेज प्रबंधन ने मुझसे कॉशन मनी और एक्सट्रा करिकुलर एक्टीविटी के नाम पर फिर 2 लाख मांगे। 

मैं मध्यमवर्गीय परिवार से हूं इसलिए अतिरिक्त फीस नहीं चुका सकती थी लेकिन नीट परीक्षा के बाद बामुश्किल मिला पीजी करने का यह अवसर हाथ से न निकल जाए इसलिए मैने 2 लाख का फिर लोन लिया, इसके बाद जैसे ही मैं ज्वाइन करने पहुंची कॉलेज प्रबंधन ने फिर दो लाख मांग लिए इसके बाद रातभर के प्रयास के बाद मैने अपनी सीट खोने के डर से मैने यह व्यवस्था भी की लेकिन कॉलेज ने टयूशन फीस 8 लाख 55 हजार से 9 लाख 90 हजार कर दी और सभी छात्रों से यह फीस जमा करने को बोला जाहिर से अचानक एक लाख 35 हजार की फीसवृद्धि सहन करना हर किसी के लिए मुश्किल था इसलिए हम सभी लोग इसके खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट गए। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने मुझे व्यक्तिगत तौर पर प्रताड़ित करना शुरु कर दिया इसके अलावा फोन पर भी मुझे यह केस वापस लेने के लिए धमकाया जाने लगा। 

इसके बाद कोर्ट ने इंडेंक्स कॉलेज को निर्धारित फीस लेने का आदेश दिया लेकिन इसके बाद फिर अगले साल 2017 में फिर 9 लाख 90 हजार मांगने लगे जो मैने जमा नहीं कर कोर्ट के आदेशानुसार 8 लाख 55 हजार ही जमा किए, इस मामले में कोर्ट जाने पर कॉलेज प्रबंधन हमे लगातार प्रताडित करने लगा खासकर एचओडी डॉ खान, इसके बाद इसी मामले में केस वापस लेने की शर्त पर  एचओडी डॉ खान ने अमानवीय व्यवहार करते हुए सार्वजनिक तौर पर हमे 2 से 3 महिने तक ओटी और डिपार्टमेंट से बाहर निकाले रखा। इसके बाद हमारा स्टायफंड भी काट लिया गया और बिना कारण हमपर हजारों रुपए का फाइन लगाया जाने लगा। कॉलेज प्रबंधन हमे इस समय का स्टायफंड कभी नहीं देना यदि कॉलेज में उस दौरान मेडीकल काउंसिल का दौरा और इनकम टैक्स का छापा नहीं पड़ता। 

मेरी एचओडी के के खान मुझे व्यक्तिगत तौर पर प्रताडित करती थी वह यह सोचती थी  कोर्ट केस करने में मेरी सक्रीय भूमिका है दरअसल वह मानसिक रूप से बीमार है इसलिए वह सायकिक रोग का इलाज भी करवा रही है वह मेडीकल कॉलेज के इस प्रोफेशन के लिए फिट नहीं है खासकर एनेस्थेटिक ब्रांच के लिए। वह हर किसी को प्रताड़ित करती है पर मैं नहीं जानती कि उसे मुझसे क्या प्राव्लम रहती थी वह मेरे लीव एप्लीकेशन पर साइन नहीं करती थी और मेरे लीव पर होने पर एचआर विभाग से मुझपर हजारों रुपए का फाइन लगवाती थी। हम पीसी स्टूडेंट होने के बावजूद भी यहां प्रताड़ित हो रहे हैं हमारा ड्यूटी टाइम सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक है इसके बावजूद दिन में चार बार एटेंडेंस के लिए पंच करना पड़ता है, हद तो यह है कि एक दिन की लीव पर एचओडी डॉ खान ने मुझपर 4500 से 6000 रुपए का फाइन लगाया, जिसपर पहले से ही भारी लोन हो उसके लिए यह राशि भर पाना संभव नही था।

 कुछ दिनो पहले मैने थर्ड ईयर की फीस जमा करने को बोला तो फिर फीस 9 लाख 90 हजार कर दी गई जिसे जमा करने से मैने मना कर दिया इस बारे में मैने डॉ अमोलकर को भी बताया था, इसके बाद चैयरमैन सुरेश भदौरिया ने मैनेजमेंट को उन सभी छात्रों से बकाया फीस वसूलने का आदेश दिया जिन्होंने कोर्ट के निर्देशानुसार फीस जमा की थी यह राशि तीन साल की प्रति छात्र चार लाख 5 हजार थी और किसी भी हालत में मैं बढ़ी हुई फीस जमा नहीं कर सकती थी। मेरे माता पिता पहले से ही बढ़ी हुई फीस के लिए रिश्तेदारों और दोस्तों से रुपए उधार ले चुके थे जिनके बस में यह राशि जमा करना संभव नहीं था। 

मेरी उम्र में अन्य इंजीनियरिंग लॉ और आर्ट सब्जेक्ट इतना कमा लेते हैं कि अपना खर्चा उठा सकें जबकि मैं सिर्फ अपने घरवालों पर ही निर्भर हूं, वह भी इसलिए कि मैं एक डॉक्टर हूं। मैने स्कॉलर और स्कूलिंग रेपुटेड कॉलेज गांधी मेडीकल कॉलेज और सेंट्रल स्कूल से की है मैने इंडेक्स कॉलेज जैसा फर्जी संस्थान पहले कभी नहीं देखा था। यहां कोई इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यवस्था डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के लिए नहीं है। इन्होंने अभी भी रिश्वत और धमकी देकर एमसीआई की मान्यता हासिल की है। मान्यता के दौरान मैने खुद इनके कंसलटेंट के फर्जी दस्तावेज और फर्जी साइन देखे हैं। ये लोग सिर्फ पीजी स्टूडेंट को प्रताडित करने में लगे हैं और खुद की नाकामी का आरोप हमपर लगाकर फीस बढ़ाते हैं और आए दिन हमारा स्टायफंड काटते रहते हैं। 

आधी रात को इनके इशारे पर शराब पीकर कुछ लोग स्टूडेंट के पास भेजे जाते हैं और लोग हमसे कोरे कागज पर साइन मांगते हैं। जो पीजी स्टूडेंट साइन करने से मना कर देता है उसपर अगले दिन मेडीकल सुप्रीटेंडेंट बिना कारण के हजारों रुपए का फाइन लगा देता है। यह असहनीय है मैं इतने इतनी प्रताड़ना और लूट सहते हुए इतने दबाव में काम और पढ़ाई नहीं कर सकती। इसलिए मैने इससे मुक्त होने का निर्णय लिया है मैं हमेशा इन लोगों से नहीं लड़ सकती। 

मैं जानती हूं मैं सुरेश भदौरिया के सामने बहुत छोटी हूं पर मैं अपने माता पिता और परिवार को कर्ज और लोन के बोझ तले नहीं देखना चाहती। मेरी एक ही अंतिम इच्छा है कि सुरेश भदौरिया को इसके बदले में सजा मिलनी चाहिए और मेरे परिवार को मेरी पूरी फीस लौटाई जाना चाहिए। और मेरे साथ पढ़ने वाले पीजी स्टूडेंट से विनती है कि आखिर तक इकट्‌ठे रहकर एक दूसरे की मदद करते रहें। प्लीज इस कॉलेज को बंद करो जहां मरीजों की जिंदगी और कॉलेज स्टूडेंट के करियर का विनाश किया जाता हो।

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Wednesday, 20 June 2018

किसान दंपति ने रोक बिरुल बाजार रोड का निर्माण

मुलताई

 नगर से होकर बिरूल बाजार की ओर जाने वाले मार्ग पर ग्राम करजगांव के समिप एक किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य वर्षों से लटका हुआ है। उक्त विवादित स्थल पर मार्ग निर्माण करने को लेकर अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को पसीने छूट रहे है। विगत दिनों अंत्योदय समिति की बैठक में करजगांव के पास अधुरा निर्माण कार्य पूर्ण करने को लेकर अंत्योदय समिति के सदस्यों ने 18 जून से आंदोलन करने की चेतावनी दी थी। जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और सड़क निर्माण हेतु जीसीबी के माध्यम से उबड़ खाबड़ मार्ग को समतल किया गया। बुधवार को नायब तहसीलदार आरआई पटवारी सहित पुलिस महकमा मार्ग निर्माण कराने पहुंचा था। जहा किसान हेमराज पत्नि के साथ डंपर के सामने बैठकर उसके खेत से सड़क निर्माण करने पर आपत्ति उठाते हुए निर्माण कार्य करने से रोक दिया। 

किसान का कहना है कि सड़क निर्माण का सिमांकन सड़क के मध्य के बिन्दू से दोनों ओर किया जाए, अकेले उसके खेत से सड़क निर्माण नही करने दिया जाएगा। जिसके बाद सड़क निर्माण कराने पहुंचे अमले को विवादित स्थान को छोड़कर शेष जगह पर सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ किया। किसान ने कहा कि पहले रोड का सिमांकन करे, जिसके बाद सड़क निर्माण हो। ज्ञात हो कि कई वर्षों से उक्त स्थान पर सड़क निर्माण पर अड़ंगे किसान द्वारा लगाए जा रहे है। जिसके चलते मार्ग पर आवागमन करने वाले वाहन चालकों को एक किलोमीटर के एरिया में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

मुलताई हत्या का फरार वारंट धराया

ग्रामीण मीडिया सेण्टर|
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मुलताई 

थाना क्षेत्र के ग्राम मंगोनाखुर्द में घाट अमरावती निवासी की हत्या में शामिल आरोपी रंजीत पिता बसंतराव को पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। वर्ष 2017 में आरोपी रंजीत पिता बसंतराव द्वारा तीन अन्य के साथ मिलकर मजदूर ढुंढने गए तो किसी बात को लेकर हुए विवाद में मारपीट की थी। जिससे आई चोटो के कारण उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने उक्त मामले में बीते कुछ माह पूर्व इंदौर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया था, जबकि चौथा आरोपी घटना के बाद से फरार था। मुखबीर से मिली सूचना पर एएसआई जीपी रम्हारिया, पीएसआई दिनेश रावत, प्रधान आरक्षक जगदीश रैकवार, सैनिक सुखदेव ने आरोपी रंजीत को अम्बेडकर वार्ड रोशन पुरा बरूड़ से पकड़कर लाया, जिसके बाद उसे न्यायालय पेश किया।
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मुलताई जुआ खेलते 8 जुआरी धराए, 60 हजार के साथ 6 मोटर सायकल जप्त...

ग्रामीण मीडिया सेण्टर| 




मुलताई।

 तहसील क्षेत्र के थाना सांईखेड़ा अंतर्गत आने वाले सुपर हाईवे ढाबा के पास खेत में अवैध रूप से ताश के पत्तों पर हारजीत का खेल खेल रहे 8 जुआरियों को पुलिस ने संयुक्त रूप से गठित दल के साथ पहुंचकर दबिश देकर जुआरियों को पकड़ा। पकड़े गए जुआरियों के पास से पुलिस ने 60, 600 रूपये नगदी एवं 6 मोटर सायकल जप्त कर जुआ एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार पुलिस अधिक्षक को सांईखेड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत सूपर हाईवे ढाबा के पास जुआफड़ संचालित होने की मुखबीर द्वारा सूचना दी जा रही थी। जिस पर पुलिस अधिक्षक द्वारा बीती रात मुलताई थाना प्रभारी आरएस चौहान, आमला थाना प्रभारी व पुलिस स्टाफ के साथ टीम का गठन कर रात्री लगभग 3 बजे दबिश दी गई। दबिश के दौरान पुलिस द्वारा सावधानी बरतते हुए रात के अंधेरे में बिना टार्च जलाए 3 किलोमीटर खेतों से होकर जुआफड़ पर सुपर हाईवे ढाबे के पास खेत में आरोपियों को पकड़ा।

 पकड़े गए आरोपियों में गोलू पिता योगेश्वर वराठे 24 वर्ष निवासी बेलमंडई थाना आमला, नंदन पिता ओमदास अतुलकर 28 साल बेलमंडई, फगनु पिता दशरथ मसराम 27 वर्ष निवासी गेंहू बारसा थाना आठनेर, रामदास पिता जुगरसा धुर्वे 35 साल निवासी जुनापानी, प्रमोद पिता चैतराम 30 साल निवासी भैंसदेही, धनराज पिता सायबु सोनेकर 42 साल निवासी दातोरा, परसराम पिता सायबू 42 वर्ष निवासी भुताईखेड़ी, विष्णु पिता लहानु धोटे निवासी हिड़ली शामिल है। जिनके पास से पुलिस ने 60600 रूपये 8 मोबाईल, 6 मोटर सायकिले व ताश के 52 पत्ते जप्त कर जुआ एक्ट के तहत कार्यवाही की गई।जुआ खेलते 8 जुआरी धराए 60 हजार व 6 मोटर सायकल जप्त|


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